बसंत पंचमी 2026: वसंत ऋतु का पावन त्यौहार और पूजा विधि
January 21, 2026 | by arunkumarknj1976@gmail.com
बसंत पंचमी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो हर वर्ष पाँचवीं माह की कृष्ण पक्ष पंचमी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी 22 जनवरी को है। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और इसे सरस्वती पूजा, वसंत संक्रांति तथा पीले रंग का उत्सव के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी को वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है। यह त्योहार प्रकृति की सुंदरता, हरियाली और नयी ऊर्जा का संकेत देता है। भारत में कृषि प्रधान संस्कृतियों में वसंत ऋतु का विशेष महत्त्व है, क्योंकि यह नई फसल, नयी शुरुआत और जीवन में खुशियों के आगमन का प्रतीक है।
सरस्वती पूजा और ज्ञान की आराधना
इस दिन देवी सरस्वती, जो ज्ञान, संगीत, कला और शिक्षा की देवी हैं, की विशेष पूजा की जाती है। विद्यार्थी, कलाकार और लेखक इस दिन देवी सरस्वती से बुद्धि, स्मरण शक्ति और सृजनात्मक ऊर्जा की प्रार्थना करते हैं। स्कूलों और घरों में सरस्वती वंदना, भोजन अर्पण, और हवन/पाठ का आयोजन होता है।
पीले रंग का महत्व
पीले रंग का विशेष महत्त्व है क्योंकि बसंत ऋतु में अधिकांश फूल पीले होते हैं – जैसे सरसों के फूल। इसलिए लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, पीले फूलों की पूजा करते हैं और पीले रंग के व्यंजन जैसे मीठा हलवा, केसर वाला दूध, सर्जना, आदि का आनंद लेते हैं।
बसंत पंचमी पर परंपराएँ
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सरस्वती पूजा – सुबह जल्दी उठकर पूजा और मंत्रोच्चारण किया जाता है।
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पंचमी व्रत – कई लोग व्रत रखते हैं और देवी को भोग लगाते हैं।
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परीक्षा और विद्या की आराधना – विद्यार्थी पुस्तकों को देवी सरस्वती के पास रखकर आशीर्वाद लेते हैं।
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पतंग उड़ाना – कई क्षेत्रों में लोग खुली जगहों पर पतंग उड़ाकर वसंत का स्वागत करते हैं।
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मधुपर्व का आयोजन – कुछ स्थानों पर संगीत, नृत्य और सामूहिक भोज का आयोजन भी देखने को मिलता है।
बसंत पंचमी की राहो-रिवाज़ें
भारत के विभिन्न हिस्सों में यह त्योहार अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में अधिकतर लोग सरसों के खेतों में घूमना, पीले फूलों का आनंद लेना और संगीत का आनंद लेना पसंद करते हैं। वहीं, बंगाल में इसे Saraswati Puja के नाम से बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
2026 में बसंत पंचमी का शुभ समय
वर्ष 2026 की बसंत पंचमी 22 जनवरी को पड़ रही है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का सुब-मुहूर्त, छोटे-बड़े पूजा-पाठ और नवोदित कार्यों की शुरुआत सबके लिए शुभ मानी जाती है।
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