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सजा देना अदालत का काम, पुलिस का नहीं: UP Police Half Encounter पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी फटकार

January 31, 2026 | by arunkumarknj1976@gmail.com

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक रुख

Dhammal News (प्रयागराज): उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ जारी ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ यानी UP Police Half Encounter पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब तक की सबसे बड़ी और तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि पुलिस को आरोपियों के पैरों में गोली मारकर सजा देने का कोई अधिकार नहीं है; यह काम केवल अदालतों का है।

1. इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक रुख

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मिर्जापुर के एक मामले की सुनवाई करते हुए यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताया। Dhammal News को मिली जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य आरोपी को गिरफ्तार करना है, उसे अपंग बनाना नहीं। UP Police Half Encounter की बढ़ती घटनाओं ने कोर्ट को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि उत्तर प्रदेश को एक ‘पुलिस स्टेट’ बनने से रोकना होगा।

2. UP Police Half Encounter: क्या है पूरा विवाद?

पिछले कुछ वर्षों में यूपी पुलिस की कार्यशैली में एक विशेष पैटर्न देखा गया है। जब भी पुलिस किसी अपराधी को पकड़ती है, तो अक्सर खबर आती है कि आरोपी ने भागने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसके पैर में गोली मार दी। इसी प्रक्रिया को Half Encounter कहा जाता है। कोर्ट ने पाया कि इन मुठभेड़ों में पुलिसकर्मियों को चोट नहीं आती, जो इसकी सत्यता पर सवाल उठाता है।

3. न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की सख्त टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने कहा, “सजा देना और न्याय करना अदालत का क्षेत्र है। पुलिस खुद को जज की भूमिका में नहीं रख सकती।” Dhammal News के विश्लेषण के अनुसार, कोर्ट ने इसे लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत बताया है, जहाँ कार्यपालिका न्यायपालिका के अधिकारों का अतिक्रमण कर रही है।

4. DGP और गृह सचिव को कोर्ट का समन

मामले की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने यूपी के DGP और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को तलब किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि क्या विभाग की ओर से इस तरह के ‘पैर में गोली मारने’ के कोई विशेष निर्देश दिए गए हैं? अदालत ने चेतावनी दी कि यदि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित जिले के SP जिम्मेदार होंगे।

5. मानवाधिकार और कानून का उल्लंघन

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और सुरक्षा का अधिकार देता है। UP Police Half Encounter के बढ़ते मामले इस संवैधानिक अधिकार को चुनौती देते हैं। Dhammal News के कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ‘त्वरित न्याय’ अक्सर ‘अन्याय’ में बदल जाता है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. ‘हाफ एनकाउंटर’ का मतलब क्या है?
जब पुलिस मुठभेड़ के दौरान अपराधी की जान लेने के बजाय उसके पैर में गोली मारती है, तो उसे ‘हाफ एनकाउंटर’ कहा जाता है।
Q2. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने कहा कि सजा देना अदालत का काम है और पुलिस को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
Q3. इस मामले में किसे तलब किया गया है?
यूपी के डीजीपी और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को कोर्ट ने जवाब देने के लिए बुलाया है।

Disclaimer: यह रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर आधारित है। Dhammal News कानून के शासन और निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करता है।

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